विश्व पुस्तक मेले को वाणी प्रकाशन का खास "तोहफा"
January 2, 2020 • Chanderpal

महेंद्र कुमार नई दिल्ली 

किताबों का महाकुंभ यानी विश्व पुस्तक मेला (World Book Fair 2020) 4 जनवरी से 12 जनवरी तक चलने वाले  इस पुस्तक महाकुंभ  को लेकर  पुस्तक प्रेमियों, लेखकों प्रकाशको के मन में खुशी की लहर है. विश्व पुस्तक मेले को लेकर वाणी प्रकाशन की क्या तैयारियां है.इसको लेकर वाणी प्रकाशन समूह के निर्देशक अरुण माहेश्वरी से दिल्ली और दिल्ली न्यूज़ के संवाददाता महेंद्र कुमार ने चर्चा की है. पिछले तीन दशकों में  हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में गंभीर लेखन देखने को मिला है। वाणी प्रकाशन इस क्रांति में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है. वाणी प्रकाशन की स्थापना  शिक्षक, लेखक और प्रकाशक स्वर्गीय डॉ प्रेम चंद महेश्वरी द्वारा की गई थी। उनके मिशन को उनकी पत्नी शिरोमणि देवी और अब उनके बेटे अरुण माहेश्वरी आगे बढ़ा रहे हैं. प्रस्तुत है अरुण माहेश्वरी के साथ चर्चा के प्रमुख

1. विश्व पुस्तक मेले को लेकर वाणी की क्या तैयारियां हैं?
पुस्तक मेला एक प्रकाशक के लिए नई सूचनाओं, जानकारियों, नई तकनीक को जानने का मंच होता है. वाणी प्रकाशन  मेले में अपनी बहुत सारी महत्वपूर्ण पुस्तकों को लेकर आ रहा है. इस पुस्तक मेले में हर प्रकार की पुस्तके मिलेगी कहानियां, बाल साहित्य, थर्ड जेंडर पर आधारित पुस्तकें, मीडिया अथवा लिटरेचर,समाजशास्त्र पर आधारित पुस्तकें होगी. इस बार वाणी प्रकाशन ने अपना स्टेशनरी विंग भी शुरू किया है. इसके माध्यम से डायरीओं पर लेखकों और शायरों के कलाम लिखे हुए होंगे. यह कदम पिछले वर्ष प्रयोग के रूप में उठाया गया था जो बहुत सफल रहा इसलिए हम इसको दोबारा पुस्तक मेले में दोहरा रहे हैं. पुस्तक मेला नए पाठकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. अपने पाठकों  की हर उम्मीद पर वाणी खरा उतरने का प्रयास करेगा

2.पुस्तक मेले के दौरान युवा पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वाणी क्या खास करने वाला है.?
युवा पाठकों को आकर्षित करने के लिए हम इस बार पुस्तक मेले में कई सारी नई योजनाओं को शुरू करने वाले हैं. पुस्तकों के साथ पाठकों को उपहार भी दिए जाएंगे. इसके लिए हमारी द्वारा पत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन भी जारी किए गए हैं. सही मायनों में वाणी युवा पाठकों के स्वागत के लिए पूरी तरीके से तैयार हैं.
हम चाहते हैं कि युवा हमारे साथ जुड़े. साल 2020 को लेकर हमने एक नई पहल शुरू की है.इस दौरान वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 20 पुस्तकों के साथ जो पाठक अपनी फोटो सोशल मीडिया पर सेंड करेगा उसको हम विशेष उपहार देंगे.

3.वाणी बाल लेखन के  लिए भी जाना जाता है.विश्व पुस्तक मेले में बच्चों को आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
वाणी प्रकाशन बाल साहित्य के लिए जाना जाता है. बच्चों के लिए लगभग 500 पुस्तकें मेले में लेकर आ रहे हैं. बच्चों का मनपसंद साहित्य हमने प्रकाशित किया है. बाल साहित्य को नए रूप में हमने परोसने की कोशिश की है. चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट से सम्मानित साहित्यकारों की पुस्तकें हम अपने स्टाल के माध्यम से इस मेले में उपलब्ध करवा रहे हैं.

4.क्या पुस्तक मेले के दौरान पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा उसकी जानकारी लोगों को कैसे मिलेगी?

पुस्तक मेले के दौरान प्रतिदिन पुस्तकों का लोकार्पण होगा. यह सब हम अपने स्टॉल पर ही करेंगे. नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया की नीतियां हमें अच्छी नहीं लगी है. नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के पैसा मांगने पर पैसा देना और उसके बाद भी प्रकाशकों के बिना इच्छा के अन्य होलो में स्टॉल उपलब्ध करवाना यह ठीक नहीं है. इसलिए हम नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के स्टॉल पर अपनी पुस्तकों का विमोचन नहीं करेंगे. नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के द्वारा यह कहा जाता है कि आप हमें इस बात की जानकारी दें कि आपके स्टॉल पर पुस्तक का विमोचन करने के लिए कौन आ रहा है. इस बात की जानकारी हम उन्हें कैसे दे सकते हैं यह तो लेखक पर निर्भर करता है कि वह किस को अपनी पुस्तक के विमोचन के लिए बुला रहा है. हम तो स्वतंत्र  है. बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं लेना चाहते हैं. बलदेव भाई शर्मा जो नेशनल ट्रस्ट ऑफ इंडिया के पूर्व डायरेक्टर रहे उन्होंने हमारे साथ समन्वय बनाकर कार्य किया लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है.

5.वाणी के लिए 2019 कैसा बीता? 
सजग प्रकाशकों के यहां हर साल  कुछ ना कुछ नया होता है. प्रकाशकों के लिए महत्वपूर्ण है कि नए आयामों, स्थानों अथवा नए लेखकों की खोज करें. हमने इन सभी पहलुओं पर 2019 में बहुत ध्यान दिया.इसलिए वाणी प्रकाशन का 2019 बहुत बेहतर बीता. वाणी प्रकाशन  इस दरमियान सफलता के शिखर पर पहुंचा.हमें हमारे पाठकों और लेखकों का भरपूर प्यार मिला. आगे भी यह प्यार बरकरार रहने वाला है. वाणी प्रकाशन हमेशा अपने पाठकों की उम्मीद पर खरा उतरने का प्रयास करता रहेगा.

6.नववर्ष  में वाणी अपने नए पाठकों, लेखकों को जोड़ने के लिए क्या कदम उठाने वाला है? 

प्रकाशक के लिए हर कदम नया होना चाहिए. साहित्य हमेशा नए आयामों के माध्यम से ही आगे बढ़ता है. जो पानी रुक जाता है वह सड़ जाता है.इसलिए पानी लगातार बहता रहना चाहिए. हम नए साल में नए प्रयोग करते रहेंगे. नए प्रयास कभी सफल होते हैं और कभी नहीं. हम हमेशा युवाओं को जोड़कर रखने का प्रयास करेंगे. अपनी इन्हीं गतिविधियों के कारण वाणी अपने पाठकों,लेखकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है. नए साहित्य की नई धाराएं अथवा नई प्रस्तुति पर हम ध्यान देने वाले हैं. सबसे पहले  थर्ड जेंडर पर पुस्तकें हम ही लोगों ने प्रकाशित करना शुरू की. 1990 में शायरी का दौर खत्म हो गया उसे आगे बढ़ाने के लिए हमने बहुत प्रयास किए और वह प्रयास सफल रहे हैं. प्रकाशकों को समय को पहचानना चाहिए और उसी आधार पर अपनी पुस्तकों को प्रकाशित करना चाहिए.

7.कोई युवा लेखक वाणी से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहता है, तो वह वाणी की कसौटी पर कैसे खरा उतर सकता है?
वाणी प्रकाशन हमेशा नए लेखकों का स्वागत करता है. इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि नए लेखक की लेखन शैली बहुत उत्कृष्ट होनी चाहिए. लेखक के पास अनुभव होना जरूरी है और उसका लिखा हुआ वर्तमान परिस्थितियों में खरा उतरना चाहिए अगर ऐसा नहीं होगा तो हम युवा लेखकों की पुस्तकों को प्रकाशित नहीं करेंगे. युवा लेखकों को वाणी से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाने के लिए मेहनत की आवश्यकता है. युवा लेखकों के लिए हमने युवा वाणी नामक एक नई संस्था का गठन किया है. जो युवा लेखकों की पुस्तकों को प्रकाशित करती है. बहुत सारे नए लेखकों की कृतियों का हमारे माध्यम से स्वागत किया गया है जो बहुत सफल रहे हैं. लोक, जनमानस, मुहावरों, भाषा यही कसौटी एक लेखक के लिए होती है. बहुत सारे पुराने साहित्यकार है लेकिन उनकी भाषा में नई ताजगी नहीं होती है तो हम उनकी पुस्तकें भी प्रकाशित नहीं करते हैं.

8.पुस्तकों पर आधुनिकरण डिजिटलीकरण का क्या प्रभाव पड़ा है? 
यह नए युग की शुरुआत है.इसका स्वागत करना चाहिए. पुस्तक, शब्द किसी भी माध्यम में उपलब्ध हो उसका स्वागत होना चाहिए. आज पुस्तकें ई बुक, किंडल ऑडियो आदि माध्यमों में उपलब्ध है.  इसके अलावा पुस्तकों के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उनके कवर को सुंदर तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए.

9.अपनी 57 साल की यात्रा के दौरान वाणी ने कई उतार-चढ़ाव देखे और आज भारत के सबसे लोकप्रिय  प्रकाशकों में वाणी की गिनती होती है.उसको लेकर आपको क्या कहना है?
वाणी अपने पाठकों और लेखकों की वजह से आज भारत में सबसे लोकप्रिय प्रकाशक बना है. उतार-चढ़ाव पर हर क्षेत्र में आते हैं. एक बार एक कार्यक्रम में किसी ने कहा कि  कौन लिखता है, कौन बिकता है. लेकिन हमने उस कार्यक्रम में कहा कि कौन लिखता है, कौन बिकता है, और कौन टिकता है इस बात पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है. टिकना बहुत जरूरी है. भाषा सभ्यता संस्कृति की पकड़ समय का ध्यान रखा जाना आवश्यक है. वाणी ने इसका पालन किया है.इसी वजह से आज इतना लोकप्रिय प्रकाशक बना है. वाणी के लेखकों का ध्यान वर्तमान संस्कृति और सभ्यता पर है.इसलिए लेखकों की कृतियां हमेशा सफलता के आयाम छूती रही है. 
हम अपनी नवज को पहचानते हैं और अधिकतर हम सफलता प्राप्त कर पा रहे हैं. वाणी की सारी पुस्तकें तो सफल नहीं हो पाई है लेकिन अधिकतर पुस्तकों को लोगों ने भरपूर प्यार दिया है.

10.वाणी प्रकाशन के साथ भारत के कई बड़े नाम जुड़े रहे हैं. इस पर आपको क्या कहना है.? 
वाणी प्रकाशन के साथ प्रोफेसर नामवर सिंह, नागार्जुन, प्रोफेसर श्यामाचरण दुबे, केदारनाथ सिंह, धर्मवीर भारती, उदय प्रकाश, हरिशंकर परसाई, मुनव्वर राणा, मनोहर श्याम जोशी, निर्मल वर्मा ऐसे अनेक लेखकों का मुझे हमेशा सहयोग मिला है. इन लेखकों की अधिकतर पुस्तके मैंने प्रकाशित की है.
इन तमाम लेखकों ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को वाणी प्रकाशन के माध्यम से लाखों पाठकों तक पहुंचाया है. एक प्रकाशन होने के अलावा आपके अंदर मानवीय प्रेम करुणा हमेशा बनी रहे. मुझे इस बात का गर्व है कि वाणी प्रकाशन भारतीय संस्कृति सभ्यता को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा काम करता रहा है. भारत के शीर्ष स्तर के साहित्यकारों की कृतियों को हमने प्रकाशित किया है.