इस बार विश्व पुस्तक मेले में प्रभात प्रकाशन का 6000 पुस्तकों का तोहफा
January 3, 2020 • DELHI AUR DELHI

प्रभात प्रकाशन भारत के लोकप्रिय प्रकाशनों में शुमार है.इसकी शुरुआत 1958 मे एक पुस्तक और 100 की पूंजी के साथ दिल्ली से हुई.प्रभात प्रकाशन संस्थान 'मूडी' द्वारा ISO 9001:2015 प्रकाशक से प्रमाणित, जो विश्व में पहली बार किसी हिंदी प्रकाशन को दिया गया है। उत्तम गुणवत्ता के लिए पिछले बीस वर्षों से भारतीय प्रकाशन उद्योग के मुख्य संघ 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स' द्वारा लगातार 'प्रकाशन में श्रेष्ठता' के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित  किया है। भारत के 60 शहरों में सर्वे कराने के बाद प्रतिष्ठित मार्केट सर्वे संस्था ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मार्केट रिसर्च) ने पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में ब्रांड प्रसिद्धि हेतु प्रभात प्रकाशन को STAR BRAND के लिए चयनित किया. विश्व पुस्तक मेले लिए प्रभात प्रकाशन की तैयारियों को जानने के लिए हमारे दिल्ली और दिल्ली न्यूज़ के  संवादाता महेंद्र कुमार ने  प्रभात प्रकाशन के निर्देशक प्रभात कुमार से चर्चा की है. हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं.उस चर्चा के प्रमुख अंश


1.विश्व पुस्तक मेले को लेकर प्रभात प्रकाशन की क्या तैयारियां हैं.?
विश्व पुस्तक मेले को लेकर प्रभात प्रकाशन की पूरी तैयारियां है. हमने पिछले 1 महीने में 50 नई पुस्तकों का प्रकाशन किया है. 2019 में लगभग 276 नई पुस्तकों का प्रकाशन किया है.इस पुस्तक मेले में हम 6000 से अधिक पुस्तकों को लेकर आ रहे हैं. यह पुस्तक मेला प्रभात प्रकाशन और उसके पाठकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. हम इस पुस्तक मेले में हर विधा पर पुस्तकों को लेकर आ रहे हैं. प्रभात प्रकाशन पुस्तक मेले में लोगों के स्वागत के लिए पूरी तरीके से तैयार है.

2.युवाओं के लिए मेले में क्या खास होगा?
युवाओं के लिए प्रभात प्रकाशन प्रेरणादायक लोगों की जीवनी पर आधारित पुस्तकों के बड़े संग्रह को मेले में उपलब्ध करवा रहा है. कैरियर से संबंधित पुस्तकों का भी एक बड़ा संग्रह हम मेले में लेकर आ रहे हैं.  समसामयिक मुद्दों के लेखों पर आधारित पुस्तकें भी मेले में उपलब्ध होगी. ज्ञान विज्ञान से जुड़े विषयों पर आधारित पुस्तकों  होगी.

3.पुस्तकों की दुनिया में 2019 प्रभात प्रकाशन का कैसा बीता? 
2019 प्रभात के लिए बहुत शानदार बीता 250 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हमने किया. हर विधा में पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है. कहानी,उपन्यास,साहित्य की विधा के अतिरिक्त ज्ञान  विज्ञान,लोकप्रिय लोगों कि जीवनिया, इतिहास की पुस्तकें,शेयर मार्केट पर आधारित पुस्तको का प्रकाशन हमने किया. प्रभात प्रकाशन का 2019 प्रकाशन की दुनिया में बहुत सार्थक साबित हुआ है. हमारी पुस्तकों को बहुत ख्याति मिली है.कई लेखकों की पुस्तक बेस्ट सेलर रिकॉर्ड में शामिल हुई है.

4.भारत अथवा दुनिया के शिखर स्तर के लोगों की पुस्तके प्रभात ने प्रकाशित की है.इसको लेकर आपको क्या कहना है.?
यह प्रभात के लिए गौरव है कि हमने भारत अथवा विश्व के अनेक लोकप्रिय लोगों की पुस्तकों का प्रकाशन किया है. वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की  पुस्तकों का प्रकाशन करने का गौरव हमें प्राप्त हैं.इसके अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा, सरदार वल्लभभाई पटेल, अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, बी आर डी टाटा, सुधा मूर्ति, कैलाश सत्यार्थी, परम पूज्य दलाई लामा, इन तमाम लोगों के अलावा हमने दूसरे देशों के लोकप्रिय लोगों की पुस्तकों को भी प्रकाशित करने का गौरव प्राप्त किया है. चाहे वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा हो, बिल क्लिंटन,हिलेरी क्लिंटन, हमें तमाम लोगों की पुस्तकें प्रकाशित करने का अवसर मिला है.

5.राष्ट्रीय पुस्तक न्यास NBT की नीतियों को लेकर आपको क्या कहना है?

मैं तो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के बोर्ड का मेंबर हूं. मुझे लगता है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दौरान किसी को तकलीफ होती है.उसके समाधान के लिए उनको   आगे आना होगा. क्योंकि यह पुस्तक मेला प्रगति मैदान में आयोजित हो रहा है और अभी प्रगति मैदान पूरी तरीके से बनकर तैयार नहीं हुआ हुआ है.स्थान की कमी है,जबकि प्रकाशकों की संख्या अधिक है.  इस सीमा में रहकर सभी को काम करने की जरूरत है. यह समस्या मुझे लगता है सिर्फ इस साल है अगले साल से व्यवस्था और अच्छी हो जाएगी. समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से बात करने की आवश्यकता है. यह एनबीटी का दायित्व है कि लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए.

6.इस नूतन वर्ष में प्रभात प्रकाशन किस संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला है.?

इस नूतन वर्ष को लेकर हमारे मस्तिष्क में अनेक प्रकल्प है जिनका हमें प्रकाशन करना है. हम एक श्रंखला पर काम कर रहे हैं. जिसमें हमने भारतीय भाषाओं की लोकप्रिय कहानियों का प्रकाशन किया है. इसके माध्यम से हम प्रयास कर रहे हैं.कि हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में लेखन करने वाले लेखकों की कृतियों को आगे बढ़ाया जा सके. प्रदेशों की लोक कथाओं लेकर हम काम कर रहे हैं. हमारे इस प्रयास से लोग प्रदेशों की संस्कृति परंपरा को जान सकेंगे. भारत के सभी राज्यों की लोक परंपरा पर आधारित लोक कथाओं को हम प्रकाशित करेंगे. हम ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करेंगे जिससे समाज के लोगों के नैतिक मूल्य और  विचार शीलता का विस्तार होगा.


7.मेले के दौरान क्या पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा.?
पुस्तक मेले के दौरान प्रभात प्रकाशन के द्वारा अनेक पुस्तकों का लोकार्पण होगा इसकी जानकारी लोग प्रभात प्रकाशन की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं.

 


8.एक लेखक जो प्रभात प्रकाशन से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहता है उसके लिए क्या कसौटी है.?
प्रभात प्रकाशन के यहां सबसे बड़ा मानक पुस्तक की विषय वस्तु है. हमारे यहां पुस्तकें प्रकाशित करने के बहुत प्रस्ताव आते हैं. हमारी प्राथमिकता होती कि हम ऐसी पुस्तकों को प्रकाशित करें जो समाज के लिए उपयोगी हो. केवल किताब छापना हमारे उद्देश्य नहीं है. बल्कि पुस्तक के माध्यम से पाठकों के ज्ञान में वृद्धि हो. हम ऐसी पुस्तकों को प्राथमिकता देते हैं जो मार्केट में उपलब्ध ना हो.
 सबसे बड़ी बात हमारी पुस्तकों में राष्ट्रीयता, संस्कृति भारतीयता, का होना आवश्यक है. लेखन के नाम पर कोई भी अश्लील सामग्री प्रभात प्रकाशन नहीं छपता है. लोगों के मन में अच्छे भाव जागृत हो.  इस प्रकार की पुस्तकों को प्रभात प्राथमिकता देता है. हमारी पुस्तकें हर क्षेत्र में अंग्रेजी की पुस्तकों को टक्कर देने वाली पुस्तके साबित हो रही है.

9.आमतौर पर हिंदी की पुस्तकों को कोट नहीं किया जाता है, ऐसा क्यों होता है?

पत्रकारिता में हिंदी की पुस्तकों को ज्यादा जगह नहीं दी जाती है. लोगों की मानसिकता है कि वह हिंदी की पुस्तकों को दोयम दर्जे का समझते हैं. अगर पत्रकारिता में हिंदी की पुस्तकों को पर्याप्त जगह मिले और उनके बारे में लिखा जाए तो मुझे लगता है.यह स्थिति सुधर जाएगी. पुस्तकों के लोकार्पण हमारे यहां रोज होते हैं.परंतु उसके जानकारी पाठकों तक नहीं पहुंचती है. हिंदी की पुस्तकें पढ़ने वाले पाठकों की संख्या अन्य भाषाओं के मुकाबले सर्वाधिक है. अंग्रेजी अखबारों में अंग्रेजी पुस्तकों पर आधारित लेखन बहुत अधिक होता है. मुझे लगता है यह पत्रकारिता की कमी है इसको सुधारने की आवश्यकता है.आप जैसे युवा पत्रकार इस मुहिम में आगे बढ़ रहे हैं.यह देखकर खुशी होती है.


10.आपके पिताजी श्याम सुंदर जी ने आपको साहित्य, संस्कृति को आगे बढ़ाने की विरासत सौंपी है. इसको लेकर आपको क्या कहना है?
 मेरे पिताजी ने दिल्ली में 1958 में प्रभात प्रकाशन की शुरुआत की. उन्होंने एक पुस्तक और ₹100 की पूंजी के साथ प्रकाशन कार्य शुरू किया. लगभग 60 वर्ष में प्रभात प्रकाशन को बुलंदियों पर पहुंचाया है. हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि उनके बताए मार्ग पर हमें आगे बढ़ते रहना है. दुर्भाग्य से इसी 28 दिसंबर को 92 वर्ष की अवस्था में वह हमें  छोड़ कर चले गए. वह हमारे लिए एक परंपरा छोड़ गए हैं.उसको समृद्ध करना हमारा दायित्व है.