हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा -:  डॉ रमा
December 31, 2019 • DELHI AUR DELHI

"नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी" 

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर दिल्ली के मशहूर कॉलेज हंसराज कॉलेज द्वारा दिल्ली के विज्ञान भवन में 10 और 11 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधि, वक्ता, विद्यार्थी, शोधार्थी भाग लेंगे. इसके अलावा भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अध्यापक,साहित्यकार सम्मेलन में भाग लेंगे.हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ रमा का कहना है कि यह सम्मेलन हिंदी के क्षेत्र में एक कीर्तिमान स्थापित करेगा.सम्मेलन में भारत और विदेशी मेहमान अपने विचार रखेंगे.हिंदी के स्वर्णिम भविष्य को और आगे बढ़ाने का प्रयास सम्मेलन के माध्यम से किया जाएगा.नई दिल्ली का विज्ञान भवन सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों के लिए प्रसिद्ध है. विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर  हंसराज कॉलेज तैयारियों में जुटा हुआ है. यह सम्मेलन हिंदी प्रेमियों के लिए बहुत लाभदायक साबित होने वाला है. हमारे दिल्ली और दिल्ली न्यूज़ के संवाददाता महेंद्र कुमार ने हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ रमा से  इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा की है.  प्रस्तुत है चर्चा के प्रमुख अंश:-

महेंद्र -: विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की क्या खासियत होगी? 

 डॉ रामा - हमारे देश में हिंदी दिवस के अवसर पर अनेक कार्यक्रम होते हैं. सितंबर के महीने में इन कार्यक्रमों की संख्या बढ़ जाती है. परंतु विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर इतने कार्यक्रम नहीं होते है. मुझे लगता है, शायद बहुत लोगों को पता भी नहीं है कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस होता है. एक विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध कॉलेज की प्रिंसिपल होने के नाते मुझे लगा कि हमारे विद्यार्थियों और अध्यापकों को पता चले कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस होता है.हमारा मकसद है कि हिंदी के प्रश्न को और बढ़ाया जाए. इसके लिए एक उचित मंच से इसके लिए पहल करने की आवश्यकता है.
  इसलिए हमने दिल्ली के विज्ञान भवन को चुना है.विज्ञान  भवन में सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों द्वारा बड़े कार्यक्रम होते हैं.इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हमने विषय रखा है. "नई दुनिया, नया भारत, नई हिंदी" वैश्वीकरण के इस दौर में दुनिया बदल रही है. दुनिया के साथ भारत भी बदल रहा है.इस बदलते दौर में हिंदी भी विस्तारित हो रही है.इन सारी बदलती स्थितियों में हिंदी की स्थिति क्या होगी.इसको लेकर मंथन की आवश्यकता है.हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है.इस कार्यक्रम में  भारत एव विश्व के अनेक विद्वान साथ मिलकर हिंदी पर चर्चा करेंगे.
 
महेंद्र -: विश्व स्तर पर हिंदी की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? 

डॉ रमा - हिंदी बोलने वालों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है. हिंदी के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है. जब से देश के प्रधानमंत्री अथवा सरकार के तरफ से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में अपनी बात रखी जा रही है. इसके कारण विश्व में हिंदी को लेकर सकारात्मक माहौल बना है. मौजूदा दौर में हिंदी की विश्व भर में स्थिति बहुत अच्छी है. और दिन प्रतिदिन इसमें विस्तार हो रहा है.

महेंद्र -: हमारी संसद और अदालतों में हिंदी का  प्रयोग कम किया जाता है. क्या इस स्थिति में बदलाव की आवश्यकता है? 

डॉ रमा - आपकी बात ठीक है.हमारी संसद और न्याय व्यवस्था में हिंदी में कार्य जितना होना चाहिए उतना नहीं हो रहा है.परंतु स्थितियां धीरे-धीरे बदल रही है.कुछ समय पहले भारत में अंग्रेजी का वर्चस्व बहुत हावी हो गया था परंतु अब ऐसा नहीं है.

महेंद्र -:  हिंदी भारत में सबसे लोकप्रिय हैं. फिर क्यों हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पा रही है?
 
डॉ रमा - मुझे  लगता है हिंदी के राष्ट्रभाषा ना बनने के पीछे भारत की पूरी जनता जिम्मेवार है. देश की जनता एक बार ठान ले कि उन्हें हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना है तो उनको कोई नहीं रोक पाएगा.हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए जनता को आगे आना होगा.सरकार अपने स्तर पर पहल कर रही है.इसमें युवाओं का योगदान और अधिक बढ़ाना होगा. युवाओं को हिंदी को अपनाना है और उसको राष्ट्रभाषा बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है.

  महेंद्र -:  क्या  आपको लगता है. हिंदी के साथ भाषाई खिलवाड़ हो रहा है? 

डॉ रमा -  मुझको  लगता है. यह भाषाई खिलवाड़ हिंदी नहीं दूसरी भाषाओं के साथ भी हो रहा है. यहां तक कि भाषाई खिलवाड़ विदेशी भाषाओं के साथ भी हो रहा है.सोशल मीडिया ने भाषाई खिलवाड़ को जन्म दिया है.हिंदी तो बहुत वैज्ञानिक भाषा है. जैसे बोली जाती है वैसे ही लिखी जाती है.सोशल मीडिया पर  भाषाई खिलवाड़ को रोकने के लिए अच्छे हिंदी लिखने वालों को आगे आना होगा.

महेंद्र -:  विश्व संवाद के लिए हिंदी की सार्थकता को लेकर आपको क्या कहना है?
 
डॉ रमा - विश्व संवाद में हिंदी की स्थिति लगातार सुधर रही है. शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां हिंदी पढ़ी और पढ़ाई ना जाती हो.सभी देशों में अमूमन रविवार के दिन हिंदी की कक्षाएं चलती हैं. विश्व के अनेक देशों को पता है.अगर भारत के बाजारों में अपनी पहुंच बनानी है तो हिंदी के साथ हाथ मिलाना होगा. भारत के लोगों से अपना संबंध मजबूत करने के लिए विदेशी लोग लगातार हिंदी पर अपनी पकड़ बना रहे हैं . भारत विश्व का बहुत बड़ा बाजार है . इस बाजार में  विश्व के अनेक देश अपनी पकड़ बनाने के लिए हिंदी के साथ चलने  का प्रयास कर रहे हैं.

महेंद्र -: हिंदी को लेकर कहा जाता है कि हिंदी में रोजगार की संभावनाएं कम है.? 

डॉ रमा -  मुझे लगता है, जो लोग यह बात कहते हैं उनके मन में हिंदी को लेकर हीन भावना है. हिंदी में रोजगार के क्षेत्र विकसित हो रहे हैं. युवाओं के मन में बैठे इस भ्रम को समाप्त करने की आवश्यकता है.अच्छी हिंदी लिखने और बोलने वालों के लिए रोजगार के अपार संसाधन उपलब्ध है.हमें अपनी भाषा का प्रयोग करने में गर्व महसूस होना चाहिए.अपनी भाषाई अस्मिता को जीने का संकल्प करने की आवश्यकता है.हमें मजबूरी में हिंदी का प्रयोग नहीं करना है बल्कि गर्व के साथ हिंदी का प्रयोग करना है.  हिंदी में रोजगार है. इसमें और वृद्धि की आवश्यकता है.

महेंद्र -: हिंदी के विकास लिए क्षेत्रीय भाषाओं  का विकास कितना महत्वपूर्ण  हैं? 

मुझे लगता है हिंदी के विकास के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का विकास होना आवश्यक है.क्षेत्रीय भाषाएं मातृ भाषाएं होती है.राष्ट्र भाषा के आधार पर हमें हिंदी में संवाद करना चाहिए.जरूरी है कि दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारत के लोगों की भाषा सीखें और  उत्तर भारत के लोग दक्षिण भारत के लोगों की भाषा सीखे.कुछ राजनीतिक लोग अपने स्वार्थ के कारण लोगों को लड़वा कर भाषाई मुद्दा बना लेते हैं.दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर बहुत कार्य हो रहा है.हमारे कार्यक्रम में भी दक्षिण भारत से बहुत सारे विद्वान शिरकत करेंगे. क्षेत्रीय भाषाओं का अपना अलग ही महत्व है. क्षेत्रीय भाषाओं ने भारत की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया है.

महेंद्र -: इन दिनों भाषाई विश्वविद्यालय की मांग हो रही है, इसको लेकर आपको क्या कहना है? 
डॉ रमा -भाषा को बचाने के लिए  भाषाईविश्वविद्यालय के अलावा भी बहुत सारे काम करने की जरूरत है. हमें भाषा का प्रयोग बढ़ाना होगा.हमें भाषाओं को अपने स्टेटस से जोड़ना होगा. जनता में भाषा के प्रयोग को बढ़ाना होगा तभी भाषाएं सुरक्षित रह पाएगी.

महेंद्र -:विज्ञापन की दुनिया में आप हिंदी को कहां देखते हैं? 
डॉ रमा - विज्ञापन  की दुनिया में हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है.कोई भी इसको नकार नहीं सकता है.समाचार के क्षेत्र में भारत में हिंदी का बड़ा बाजार है.ऐसा किसी अन्य भाषा में नहीं है.यहां तक की अंग्रेजी चैनलों ने भी हिंदी में अपनी शुरुआत कर दी है.पेप्सी को भी करना पड़ा 'यह दिल मांगे मोर' अधिकतर कंपनियां विज्ञापनों में हिंदी का प्रयोग कर रही है.विज्ञापन की दुनिया में हिंदी में बहुत स्कोप है.

महेंद्र-: भारतीय सिनेमा की हिंदी को लेकर आपको क्या कहना है? 
डॉ रमा - भारतीय  सिनेमा ने हिंदी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है.दुनिया के तमाम देशों में हिंदी के गाने गुनगुनाए जाते हैं.भारतीय कलाकारों को हिंदी की वजह से विश्व स्तर पर पहचान मिली है.और उन तमाम कलाकारों को पूरी दुनिया जानती है.इसलिए कहा जा सकता है भारतीय सिनेमा हिंदी के विकास में अहम योगदान दे रहा है.
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले इस सम्मेलन से जुड़ी जानकारी को आप हंसराज कॉलेज की वेबसाइट द्वारा प्राप्त कर सकते हैं.अथवा निम्न नंबरों पर फोन करके भी आप इस जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं.
 principal_hrc@yahoo.com पर मेल करें
011-27662444, 8920116822, 9871907081, 9968993201