अपराध निंयत्रण के साथ त्वरित न्याय भी जरूरी : विक्रम सिंह
October 19, 2019 • Chanderpal

डीएडी न्यूज नई दिल्ली
भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद  विभिन्न पदों पर अपनी महत्वपूर्ण सेवा के बदौलत अपनी खास पहचान बनाने वाले विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के रूप में जून 2007  से सितम्बर 2009 तक अपने अमूल्यएआविसमरणीय एवं ईमानदार सेवा के  बदौलत   अपनी अमिट छाप लोगो के दिलो पर छोड़ी हैं । एक निडर एवं ईमानदार पुलिस अधिकार के रूप में  विक्रम सिंह ने अपनी पहचान बनाई। इन्हे अनेको बार  उनके उत्कृष्ट कार्यो के लिए सम्मानित भी किया जा चूका है। सेवानिवृत के बाद नयी पीढ़ी को बेहतर शिक्षा प्रदान करना की दिशा में इन्होने अपना प्रयास शुरू कर दिया है। वर्तमान में वह नॉएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर के रूप  में अपनी सामाजिक जिम्मेवारियों का निर्वाह कर रहे है। दिल्ली और दिल्ली समाचार पत्र की संवादाता निकिता ठगुन्ना ने श्री विक्रम सिंह से जनसरोकार एवं सामाजिक विषयों पर उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने बड़ी ही बेबाकी से सभी सवालों के जवाब दिये । प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के अंश  

 Q  आज अपराध का दर इतना क्यों बढ़ता जा रहा है‍?
 अपराध आज की तारीख में कैंसर की ट्रबल स्टेज  में है  नए नए अपराध जैसे साइबर  क्राइम  यौन  शोषण ‍   चैन स्नैचिंग हत्या वरिष्ठ  नागरिको के साथ अत्याचार  आदि। आप गिनती तो कीजिये। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से  पडोसी देश द्वारा षडयंत्र आ रहे है और  रोकने के लिए पुलिस की संख्या उस अनुपात में दिनोदिन बढ़ायी नही जा रही है ।  इसके अलावा  जो कोर्ट के ऊपर इसका वर्क लोड बढ़ चुका है जिस कारण जो एक फेयर ट्रायल की बात आनी  चाहिए वह  फेयर ट्रायल नहीं हो रहा  है। दोषीओ के खिलाफ त्वरित कारवाई नहीं होने  से अपराधियों के हौसले बुलंद होते है । न्याय के प्रति  विश्वास कम होता जाता है यह एक ज्वलंत विषय है। पेशेवर अपराधियों द्वारा लगातार अपराध की घटनाओ को  अंजाम देने से अपराध बढ़ता जाता है और फिर पुलिस के सामने थर्ड डिग्री या इनकाउंटर ही विकल्प के रूप में बदल जाता है ऐसे में पुलिस की कारवाई  कठघरे में आ जाती  है इसीलिए जरूरी है पूरी व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए इसपर चिंतन मंथन किया जाये।   पिछले 15  सालो का अख़बार खोल  कर देखे तो किसी भी दोषी को त्वरित सजा नहीं मिली इसे हम  न्यायिक प्रक्रिया की कमी के रूप में देख सकते हैं अगर यह नहीं हुआ तो व्यवस्था की  गुणवत्ता नहीं  बढ़ेगी।  पुलिस प्रशासन में भी अनुशासनहीनता एवं भष्ट्राचार  की बातो से इंकार नहीं किया जा सकता परन्तु पहले ऐसे पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता था परन्तु आज एक्शन अगेंस्ट पुलिस में कमी आयी है। 

Q  पहले आम जनता में पुलिस के प्रति एक खौफ का माहोल था अब इसे आप किस रूप में देखते है ?
 भष्ट्राचार एक व्यापक समाजिक बुराई है इससे न्याय प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है जिसके साथ अन्याय होता है उसे न्याय न मिलने के कारण उसका विश्वास व्यवस्था से  उड़ जाता है । रिश्वत के तौर पर लिया गया धन से इन्साफ की हत्या हो जाती है अाप सहज अंदाज़ा  लगा सकते है की एक व्यक्ति जिसके साथ  अन्याय हुआ हो  वह  किस मानसिक पीड़ा के दौर  से गुजरता है और जब उसे इन्साफ नहीं मिलती तो वह पीड़ा दोगुनी हो जाती है इसीलिये अव्यवस्था  चाहे किसी स्तर पर हो इसे कही से भी न्याय संगत नहीं कहा जा सकता है इसीलिए भ्रस्टााचार पर पूर्णविराम लगाने के लिए कठोर करवाई की जरूरत है लेकिन यह भी जमीनी हकीकत है की भ्रस्टााचार ने देश में अपनी जड़े जमा ली है और यह नीचे से ऊपर तक एक चैन की तरह जुड़ा हुआ है  जबतक  भष्ट्राचार को खत्म  नहीं किया जायेगा तबतक अपराधी को सजा दिलाना एवं पीड़ित को न्याय दिलाना संभव नहीं है। पुलिस जिस पद और गोपनीयता की शपत लेती है उसे पूरे कार्यकाल  के दौरान पालन किया जान चाहिए या उसे करवाया जाना चाहिए।   

Q सीबीआई और कोर्ट  की विश्वसनीयता  को कैसे प्रभावी  बनाया जा सकता है ?
विश्वसनीयता बनाने में दशको लग जाते है और तोड़ने में एक पल नहीं लगता चाहे वह  कोर्ट कचहरी की बात हो पुलिस प्रशासन की या अन्य  रूप में क्योकि जो सत्यनिष्ठा और आपका  स्वाभिमान  होता है उसपर प्रश्नचिन्ह  खड़ा हो जाता है।  अगर हम अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से करते है  रिश्वत नहीं लते है शराब नहीं पीते  है  और अन्य गलत काम से परहेज़ करते है तो हमारा आत्म विश्वास एवं अहमियत लोगो के बीच बढ़ती  है  और इसे हमे अपनी कामयाबी माननी चाहिए इससे हमारी छवि में बढ़ोतरी होती  है तो हम अपनी नैतिक जिम्मेवारियाे  से दूर हो जाते  है इसका खामियाज़ा समाज को भुगतना पड़ता है इसीलिए हमे अपनी नैतिक  जिम्मेवारियाे  का एहसास होना चाहिए और एक बेहतर समाज निर्माण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। 

Q पुलिस कार्रवाई में राजनीती हस्तक्षेप को आप किस रूप में देख रहे है ?
 पुलिस कार्रवाई में  राजनीती हस्तक्षेप एक  ज्वलंत प्रश्न है और इस कड़वी सचाई से इंनकार नहीं किया जा सकता है  एक पुलिसकर्मी कई तरह के दबावों के  बीच  कार्य करती  है और इसमें राजनीती दखल देकर एक अपराधी को अपराध मुक्त करने की सिफारिश  की जाती है और यह स्तिथि पुलिस के िलए काफी असहज होती है। ऐसे में पुलिस क्या करे वह अपनी जिम्मेवारियों को निभये या फिर अपनी नैतिक जिम्मेवारियों से दूर हो जाए यह तय करना बहुत कठिन हो जाता है हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ही इस तरह की है जिसमे प्रत्येक क्षेत्र में राजनितिक हस्तक्षेप की पूरी गुंजाइस होती है इसका पूरा दोष पुलिस के सर  मढ़ दिया  जाता  है। यह व्यव्स्था का दोष है जब एक अपराधी अपराध करने के बाद दोष मुक्त हो जाए  या उसे सजा न मिले तो उसके हौसले और बुलुंद हो जाते  है और अपराध की संख्या में  बढाैतरी का बहुत  बड़ा कारण  है  मैं  यहाँ तक कहता हू  की राजनितिक हस्तक्षेप अपराध को बढ़ावा देने में  अहम भूमिका निभाते है।


    
  Q अपराध नियंत्रण में पुलिस कार्रवाई  काफी है या फिर इसके मनोवैज्ञानिक पहलू पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए?
निश्चय ही पुलिसिया कार्रवाई के अलावा भी मनोवैज्ञानिक पहलू पर विचार होना चाहिए अपराधियों के भी रिसर्च सेंटर होते हैं क्योंकि जो संगठित अपराधी होते हैं उसमें क्राइम इंडिकेट्स होते हैं जैसे मनोवैज्ञानिक क्राइम होते हैं  प्रोन देखकर क्राइम होते हैं  ड्रग्स लेने के बाद क्राइम होते हैं तो हर क्राइम के लिए एक विशेष विश्लेषण अनुसंधान और साथ ही एक रणनीति बनानी चाहिए अब जमाने चले गए की इत्तफाक से क्राइम होते थे अब विभिन्न व्यवसाय के चरित्र से अपराध जुडा हैं यह पहले नहीं होता था अब इसके लिए मनोवैज्ञानिक पहलू की  आवश्यकता है। तिहाड़ जेल की पुलिस महानिदेशक रहते हुए किरण बेदी जी ने अपराधियों के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए कई तरह के नए प्रयोग किए थे । जिसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया अपराध एक मानसिक स्थिति है जिसे ठीक करने के लिए उसके व्यावहारिक पहलु पर ध्यान देकर उसके विचार को बदलना तथा अपराध से होने वाले नुकसान के बारे में उसे बताना जरूरी होता है ताकि वह राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकें। किसी भी अपराधी का ऐसे ही उसका पिछला इतिहास देखकर उसका विश्लेषण करना  चाहिए  कि वह अपराधी बना या व्यवसायिक रूप से अपराधी है और इसे चिन्हित कर उसी हिसाब से उसे मनोवैज्ञानिक तरीके से सुधारने की कोशिश करनी चाहिए यह अपराध नियंत्रण की दिशा में काफी कारगर सिद्ध होगा।

Q  घरेलू हिंसा में आपकी क्या राय 
है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता हैं?
यह अपराध है भी लेकिन समाज से जुड़ा हुआ पूर्व से हमारे देश में पितृ प्रधान्ाता   चलता आ रहा है । जहां पुरुषों को प्राथमिकता दी जाती है और महिलाओं को अहमियत नही दी जाती   है यही सबसे बड़ी चिंता है जहा हमारे समाज में इसके लिए गहन विचार विमर्श की आवश्यकता है। परिवार से ही समाज का निर्माण होता है वहीं शिक्षा समाज में एक सकारात्मक दिशा के रूप में पहुचती है  लेकिन आजकल परिवार में ही इतना कष्टदायक व्यवहार का माहौल है कि पुरुषों को सर्वप्रथम रखकर महिलाओं को छोटा समझ कर उनका अपमान करना एक नकारात्मक परिपाटी बन गई। परिवार में लड़कियों और लड़कों में आमतौर पर भेदभाव किया जाता है चाहे वह उनका रहन.सहन पढ़ाई लिखाई या खान पान का मामला हो।  इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है आज के समय में महिलाएं भी सभी क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है जहां तक घर के अंदर हिंसा का सवाल है यह समझना होगा कि परिवार में महिला का अपना खास महत्व है परिवार में महिला का महत्वपूर्ण योगदान होता है और हमारे समाज में महिलाओं को पूजनीय माना गया है इसलिए महिलाओं की कदर करना जरूरी है और इसी से एक स्वस्थ समाज की स्थापना होगी साथ ही समाज की दूसरी बड़ी समस्या दहेज प्रथा है जिसमें लड़की के परिवार से पैसे लिए जाते हैं अब ऐसी स्थिति में लड़की के जन्म के बाद ही परिवार यह मानने लगता है इसकी  शादी में काफी खर्च करना होगा इस कारण से भ्रूण हत्या भी बढ़ रही हैं। इस तरह की सोच हमारे देश में ही है लेकिन विकसित देशों में इस तरह की सोच नहीं है साथ ही उन राष्ट्रों का विकसित होने का यह भी एक बड़ा कारण है। महिला और पुरुषों में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए तभी समाज का समग्र विकास होगा नारी के बगैर सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। एेसे में पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता से हमें बाहर निकलना होगा और एक समरस समाज की स्थापना करनी होगी। इस तरह की मानसिकता के पीछे शिक्षा भी एक बढ़ा कारण है इसलिए शिक्षा के स्तर को बढ़ाना होगा तभी इस तरह के मानसिकता से हम निजात पा सकते हैं।

Q पुलिस की अपनी व्यक्तिगत क्या समस्याए है?
 पुलिस का काम चुनौतीपूर्ण है कई तरह के दवाबो के बीच वह अपनी जिम्मेवारियों का निर्वाह करता है ऐसे में उसे भी कुछ खाली  समय की जरूरत है क्योंकि उसका भी परिवार हे और परिवार की भी कुछ समस्याए  होती है। मैंने देखा है कभी_ कभी पुलिसकर्मी को २४ घंटे काम करना पड़ता है ऐसे में वह अवसाद  का शिकार हो  जाते है इसीलिए जरूरी है कि उन्हें सप्ताह में एक दिन का अवकाश निश्चित रूप से मिले ताकि वह मानसिक रूप से खुश रह सके। 

Q जस्टिस डिले और जस्टिस डीनाये  पर आपके क्या विचार है? 
यह काफी अहम सवाल है न्याय में देरी से न्याय के प्रति अविश्वास पैदा होता है। न्याय जितने जल्दी मिले उतना बेहतर है। कोर्ट के ऊपर काम का का इतना  दवाब होता है कि न्याय मिलने में दशक लग जाते है इसका फायदा उठाकर अपराध करने वाले सबूतों को मिटा देते है  कई गवाह मर जाते है  कई गवाहो को तोड़ लिया जाता है। इस तरह न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है इसीलिए जरूरी है की न्याय शीग्र दिया जाये और इसके लिए फ़ास्ट  ट्रैक कोर्ट की स्थापना भी की जारी है। यह एक बेहतर प्रयास है साथ ही  इसकी संस्था की संख्या बढनी चाहिए  । 

Q उत्तर प्रदेश के अपराधिक हालात पर आपकी क्या टिप्पणी हैं?
उत्तर प्रदेश के अपराधिक हालात काफी हद तक काबू में है जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई है अपराध के ग्राफ में काफी कमी आई है । कई कठोर फैसले सरकार के द्वारा िलए गये  इसका असर भी देखने को मिल रहा है लेकिन अपराध को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिएऔर अभी कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है । कई मामलों में यह भी देखा जाता है कि पुलिस को निषकि्रयता के चलते भी अपराधिक मामलों में एक्शन लेने में देरी हो जाती है मसलन कुलदीप सेंगर के मामले को आप ले सकती हैं जिसमें पुलिस कार्रवाई में देरी हुई और अपराध के नियंत्रण के लिए एक सिपाही से लेकर उच्च पुलिस अधिकारी तक का अपराध नियंत्रण में सहभागिता होती है इसीलिए अगर हम सरकार या मुख्यमंत्री से अपेक्षा करें की वही अपराध को नियंत्रण करेंगे तो यह बेमानी होगी इसीलिए अपराध नियंत्रण  से जुडे सभी पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी तभी अपराध पूर्ण रूप से खत्म हो सकता है।

Q  आप अपने जीवन के किसी याद कर पल के बारे में बताएं?
मैं चाहे पुलिस के किसी भी पद पर रहा हूं लेकिन सबसे पहले इंसान हूं इसीलिए भावनात्मक मुद्दे मेरे लिए भी बहुत मायने रखते हैं मुझे याद है मैं एक बार काफी थका बैठा था एक अजनबी महिला आई उन्हौनें अपनी फटी साड़ी से मेरे पसीने पूछे मुझे काफी सुकून मिला जैसे कोई देवी स्वरूप महिला साक्षात ऊपर से मुझे ही आशीर्वाद देने आई हो उस पल को मैं आज तक नहीं भूल पाया ।